अखबार

मैंने एक ख्वाब देखा था । जो की मेरा सब से बड़ा मकसद बन गया, अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए । हर तरफ वो एक लहर नज़र आने लगी । मेरी उमीद को जगाने लगी । मेरा ख्वाब क्या था ? ये वो एहसास था जो मैंने पहली बार किया था । मेरे सफ़र का वो ख्वाब किसी हमसफर को अपने जीवन का हिस्सा बनना । देंखेगे की ये ख्वाब सच होता हैं के नहीं ?

इस उमीद में मैंने दो साल निकल दियेे । फिर एक दिन वो भूरी आंखे , मुस्कराता हुअा चेहरा लेकर मेरे सामने से गुज़रा ! तब वो एहसास , ख्वाब सच लगने लगा । पहली नज़र में भाने लगा । हमसफर वो कहलाने लगा । मालूम अब ये करना था की वो भी मूझे इस नज़र से देखता हैं के नहीं ? फिर एक दिन रास्ते में जाते -जाते कंधे से कंधा टकरा गया ,उस का भी दिल मुझ पर आ गया । ये ख्वाब पूरा होता देखने लगा । और मेरा ये ख्वाब अखबारो में बिकने लगा …….. !

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खुशियों कि आस

सुूबह उठते समय बस मन में ये ही सोच आती हैं , कि आज मेरा दिन अच्छा हो , कुछ अच्छा सुनने को मिले , खुशियों से भरा दिन हो । जब तैैयार हो कर घर से निकलते हैं तो उम्मीद बरकरार रहती हैं । कि शयद कुछ अच्छा होगा । जब अपने ऑफीस पहुँच जाते हैं । तो उम्मीद और बड जाती हैं । अगर बौस अपने ऑफीस मैं भुलाले तो एक उम्मीद और बड़ जाती हैं । कि कुछ अच्छा होगा । मगर ! जब बौस कहते हैं की आज तुम्हारा आखरी दिन हैं । तब वो सारी उम्मीद कुछ अच्छा होने की टूट जाती हैं । जो सपना घर से निकलते समय लिया था । वो चूर चूर हो जाता हैं ।

उम्मीद ! कभी नहीं करनी चाहिए ।

किसी से भी नहीं ………….

आज़ादी

मेरी जिंदगी में बहुत खट्टी मिट्ठी यादेंं हैं , मेरे जन्म से ले कर अब तक मेरा सफ़र बहुत हसीन था । जो कुछ सोचा नहीं थी वो कुछ मैंने देखा अपने इस सफ़र में , अपने मैं रहने वाली कब दुनिया की प्रवाह करने लगी पता ही नहीं चला । जब मैं अकेेली बैैठती हूँ तो सोचती हूँ की दुनिया की इतनी प्रवाह क्योंं , क्यों ये सोचना के दुनिया मेरे बारे क्या सोचती हैं । इस तरह की बातें सोच कर मैंने अपनी खुशी खत्म कर दी। क्या मिला मूझे दुनिया को सोच कर , अब उमीद नहीं रही की मैं कुछ अकेेले कर सकती हूँ । हमेशा मूझे किसी के सहारे की जरूरत क्योंं पडती हैं । अब बस मैं अपनी मर्जी से जीना चाहती हूँ । खुद को आज़ाद करना चाहती हूँ ।

उदासी

अब जीने की चाह नहीं

बचा कोई राह नहीं

कब तक खामोश राहु मैं

सब्र अब टूट गिया

अपनी जिंदगी से अब मैं रुठ गिया

आँख से पानी आ रहा हैं

इंसान ये अब गभरा रहा हैं …………

अधूरी कहानी

मेरी कहानी अधूरी थी

कुछ मेरी भी मजबूरी थी

मगर कोई समझा ना इस बात को

छुपाया सब से मैंने इस राज को

मैं कर रही थी गलत उसके साथ में

मूझे बेड़ी नज़र आ रही थी उसके हाथ में

मजबूर हो कर वो सब कुछ देख रहा था

खिला रही थी उसको मैंं वो भी खेल रहा था

सब्र से सब कुछ वो झेल रहा था

रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रहा था

मगर सब कुछ फ़ेल हो रहा था

इसी लिये मैँने रोक दिया अपने सफ़र को

छोड़ दिया अधूरा मैंने अपनी कहानी को …..

दोस्त

एक दिन मैं सफर पर निकली , उस सफ़र ने मुझे बहुत कुछ सिखाया की वो कभी भी ना भूलने वाला सफ़र बन गया। उसे सफ़र मैं कुछ ऐसे लोग मिले जो बहुत अजीब किस्म के लोग थे । वो इस तरह कर रहे थे, जैसे वो मूझे पहले से ही जानते थे । मगर मैं एक दम से किसी से ना बात करने वाली , अपने मैं रहने वाली थी । वो लोग दो लड़कियाँ और एक लड़का था । उन्होंने मूझे बहुत घुमाया, खिलाया और मूझे हँसाने की कोशिश कर रहे थे । मगर मैं उन से दूर जा रही थी । इतने मैं रिदम नाम की लड़की ने मूझे पूछा की तुम हम से दूर क्योंं जा रही हो । हम तुम्हारे दोस्त जैसे हैं । मैँने उसे कहाँ की मूझे दोस्त शब्द से नफ़रत हैं । तब उस जफ़र नाम के लड़के ने कहा की दोस्त शब्द से नफ़रत ? अरे ये तो सब से प्यारा शब्द हैं । दोस्त का मतलब ‘ जोश ‘ जो हमेशा आगे बढ़ने का सहारा बनते हैं । एक बार दोस्त बना कर तो देखो सफ़र रंगीन हो जाएगा । इस से ये पता चलता हैं की दोस्तो बिना सफ़र अधूरा हैं ।

Happy friendship day to all my friends 😘